Why does honey not spoil even after thousands of years? शहद हजारों साल बाद भी खराब क्यों नही होता हैं।

  

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Why does honey not spoil even after thousands of years?

 क्या आप लोग जानते हैं शहद सालों साल चलने वाला खराब क्यों नहीं होता.?

मधु गाढ़ा, चिपचिपा, हल्का पीलापन लिए हुए बादामी रंग का / हल्के भूरे रंग का, अर्द्ध पारदर्शक, सुगन्धित, मीठा तरल पदार्थ है। वैसे इसका रंग-रूप, इसके छत्ते के लगने वाली जगह और आस-पास के फूलों पर ज़्यादा निर्भर करता है।

शहद विभिन्न प्रकार का होता है इनमें यह वर्गीकरण प्रायः उन मधुमक्खियों द्वारा मधुरस एकत्रित किये जाने वाले प्रमुख स्रोतों के आधार पर होता है। इसके अतिरिक्त शहद के संसाधन और शोधन की प्रक्रिया के आधार पर भी किया जाता है।

शहद के विशिष्ट तत्वों का संयोजन उसे बनाने वाली मधुमक्खियों पर व उन्हें उपलब्ध पुष्पों पर निर्भर करता है। शहद हल्का होता है, इसे जिस चीज़ के साथ लिया जाए उसी प्रकार के प्रभाव दिखाता है। शहद पर देश, काल, जंगल का प्रभाव पड़ता है। अतः इसके रंग, रुप, स्वाद में अन्तर रहता है।

आयुर्वेद में ऐसी मान्यता है कि अलग-अलग स्थानों पर लगने वाले छत्तों के शहद के गुण वृक्षों के आधार पर होते हैं। जैसे नीम पर लगे शहद का उपयोग आंखों के लिए, जामुन का मधुमेह, सहजने का हृदय, वात तथा रक्तचाप के लिए बेहतर होता है।

एक किलोग्राम शहद से लगभग 5500 कैलोरी ऊर्जा मिलती है। एक किलोग्राम शहद से प्राप्त ऊर्जा के तुल्य दूसरे प्रकार के खाद्य पदार्थो में 65 अण्डों, 13 कि।ग्रा। दूध, 8 कि।ग्रा। प्लम, 19 कि।ग्रा। हरे मटर, 13 कि।ग्रा। सेब व 20 कि।ग्रा। गाजर के बराबर हो सकता है।

रासायनिक विश्लेषण करने पर शहद मे बहुत से पोषक तत्व होते है जैसे - फ्रक्टोज़ 38।2%, ग्लूकोज़: 31।3%, सकरोज़: 1।3%, माल्टोज़: 7।1%, जल: 17।2%, उच्च शर्कराएं: 1।5%, भस्म: 0।2%, अन्य: 3।2%। वैज्ञानिकों ने यह सिध्द कर दिया है कि शहद पौष्टिक तत्वों से युक्त शर्करा और अन्य तत्वों का मिश्रण होता है।

जिससे कई पौष्टिक तत्व मिलते हैं जो घाव को ठीक करने और टिश्यू के बढ़ने के उपचार में मदद करते हैं। शहद में लगभग 75% शर्करा होती है जिसमें से फ्रक्टोज़, ग्लूकोज़, सुल्फोज़, माल्टोज़, लेक्टोज़ आदि प्रमुख हैं। इसमें अन्य पदार्थों के रूप मेंप्रोटीन, एलब्यूमिन, वसा, एन्जाइम अमीनो एसिड, कार्बोहाइड्रेट्स, आहारीय रेशा, पराग, केसर, आयोडीन और लोहा, तांबा, मैंगनीज, पोटेशियम, सोडियम, फॉस्फोरस, कैल्शियम, क्लोरीनजैसे मानव स्वास्थ्य के लिए उपयोगी खनिज लवणों के साथ ही बहुमूल्य विटामिन - राइबोफ्लेविन, फोलेट, विटामिन ए, बी-1, बी-2, बी-3, बी-5, बी-6, बी-12 तथा अल्पमात्रा में विटामिन सी, विटामिन एच और विटामिन "के" भी पाया जाता है।

शहद में विभिन्न अन्य यौगिक भी होते हैं जो एंटीऑक्सीडेंट्स का कार्य करते हैं। सामान्यतः शहद कुछ विशेष चीनीयुक्त क्षार पदार्थों तथा धातु पदाथों का सम्मिश्रण होता है, किन्तु इसकी 75 प्रतिशत चीनी वह नहीं है, जो गन्ना मिलों द्वारा उत्पादित की जाती है। दो प्रकार की चीनी और खोजी गई है - (1) ग्लूकोज़ अंगूरी, (2) फलों के रस से उत्पादित फ्रक्टोज शर्करा।

इन चीनियों का कोई हानिकारक प्रभाव रोगी पर नहीं पडता, जबकि सामान्य चीनी उनके लिए हानिप्रद हुआ करती है। मधु में मिलने वाली अंगूरी शर्करा बहुत आसानी से पचने वाली होती है।

शहद चीनी के मुकाबले बहुत फ़ायदेमंद होता है, इसलिए हमें चीनी के स्थान पर शहद का उपयोग करना चाहिए। शहद का स्वाद बेहद मीठा होता है। शहद मैं जो मीठापन होता है वो उसमें पाए जाने वाली शर्करा (शुगर) मुख्यतः ग्लूकोज़ और फ्रक्टोज शुगर के कारण होता है, जिसकी मात्रा 70 से 80 प्रतिशत है।

इस शर्करा में ग्लूकोस और फ्रुक्टोस बराबर अनुपात में पाया जाता है। ये तत्व सीधे रक्त में शोषित होकर तुरंत ऊर्जा प्रदान करते हैं। प्रोटीन्स और अमीनो एसिड तत्व मुख्यतः पौधों से प्राप्त होते हैं। इनकी मात्रा विभिन्न प्रकार के शहद में अलग- अलग होती है।

शहद में यूँ तो कई प्रकार के ऐसे विटामिन्स पाए जाते हैं, जो मनुष्य के लिए अल्प महत्व के होते हैं, परंतु वे शहद के अन्य तत्वों के साथ मिलकर एक पूरक आहार का काम करते हैं। विटामिन बी-कॉम्प्लेक्स, जो विभिन्न विटामिन्स का समूह है, वह भी इसमें मिलता है। यह भूख को बढ़ाने में सहायक है तथा मानव के नाड़ी-तंत्र को दृढ़ता प्रदान करता है।

शहद में एंजाइम्स का उद्गम, काम करने वाली मादा मधु मक्खियों की ग्रंथियों का स्त्राव है। यह फूलों के रस के शहद में परिवर्तित होने के समय उसमें मिल जाते हैं। एंजाइम्स पाचन क्रिया को बढ़ाते हैं। लगभग 11 खनिज (मिनरल्स) एवं 17 आंशिक तत्व सामान्य शहद में पाए जाते हैं। इन खनिजों की मात्रा शहद के प्रकार पर निर्भर करती है। गहरे रंग के शहद में खनिज की मात्रा हल्के रंग की तुलना में अधिक होती है।

शहद में पोटाशियम होता है जो रोग के कीटाणुओं का नाश करता है। शहद में लोह-तत्व अधिक होता है। इसमें जो चिकनाई मिलती है, इसे पचाने में पाचन संस्थान को कोई श्रम नहीं करना पड़ता। यों कई वर्षों तक रखा रहने पर भी शहद सड़ता नहीं, किन्तु यदि उसमें किसी चीज़ की मिलावट कर दी जाए, तो शीघ्र ही या तो वह उससे अलग हो जाता है अथवा खाने योग्य नहीं रह जाता।

इस प्रकार यह अपनी प्रामाणिकता को बनाए रखता है। शहद में जो तत्व पाए जाते हैं, उन तत्वों को मिलाकर शहद निर्माण के लिए वैज्ञानिकों ने अथक प्रयास किए, किन्तु सफलता नहीं मिल सकी, जबकि दूध तथा अन्य पदार्थ इस प्रकार बनाए जा चुके है

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