| ।Why are clocks forward in the summer months in western countries? |
क्या आप सब जानते हैं इसकी वजह ये है कि उत्तरी गोलार्द्द में गर्मियों में सूरज बहुत जल्दी उगता है और देर से डूबता है। इसलिए अगर घड़ियां आगे कर दी जाएं तो दिन की रोशनी का ज़्यादा उपयोग हो सकता है।
इसका सुझाव सबसे पहले 1784 में सुप्रसिद्ध वैज्ञानिक बैंजामिन फ़्रैंकलिन ने दिया था। फिर सन् 1907 में विलियम वैलैट नामके एक अंग्रेज ने वसंत से लेकर पतझड़ तक घड़ियों को 80 मिनट आगे करने जाने का सुझाव दिया।
लेकिन ब्रिटन की संसद ने इसे ठुकरा दिया। सन् 1916 में आख़िरकार एक अधिनियम पारित किया गया जिसके अनुसार वसंत में घड़ियों को एक घंटा आगे करने और फिर पतझड़ में उन्हें ग्रीनिच मान समय पर लौटा देना तय हुआ।
यूरोपीय संसद के एक अधिनियम के अनुसार मार्च महीने के अंतिम रविवार से लेकर अक्तूबर के अंतिम रविवार तक ग्रीष्म कालीन समय लागू रहता है।
| Why does the sound of water filling keep changing? |
अक्सर देखा जाता है कि नल या फ़िल्टर से पानी भरते समय बर्तन, बोतल या अन्य किसी वस्तु की आवाज़ में परिवर्तन होता रहता है। इसके पीछे भी विज्ञान काम करता है। वस्तुओं में कम्पन्न करने से विभिन्न तरह की ध्वनियाँ उत्त्पन्न होती हैं।
जब बर्तन में पानी गिरता है तो बर्तन की धातु कांपने लगती है। इसके अलावा एक और आवाज़ होती है जो पानी की सतह के ऊपर के वायु स्तम्भ के कम्पन्न से पैदा होती है।
वायु का स्तम्भ जल की सतह और बर्तन के मुंह के बीच बनता है। खाली बर्तन में पानी गिरने से इसकी आवाज़ काफी भारी व क्रमशः बढती जाती है।
वायु स्तम्भ की लम्बाई के अनुसार ही ध्वनि की आवृति उत्पन्न होती है। लम्बा वायु स्तम्भ कम आवृति की ध्वनि पैदा करता है, वायु स्तम्भ की लम्बाई कम होने के साथ साथ ध्वनि की आवृति बढती जाती है।
अक्सर देखा जाता है कि नल या फ़िल्टर से पानी भरते समय बर्तन, बोतल या अन्य किसी वस्तु की आवाज़ में परिवर्तन होता रहता है। इसके पीछे भी विज्ञान काम करता है। वस्तुओं में कम्पन्न करने से विभिन्न तरह की ध्वनियाँ उत्त्पन्न होती हैं।
जब बर्तन में पानी गिरता है तो बर्तन की धातु कांपने लगती है। इसके अलावा एक और आवाज़ होती है जो पानी की सतह के ऊपर के वायु स्तम्भ के कम्पन्न से पैदा होती है।
वायु का स्तम्भ जल की सतह और बर्तन के मुंह के बीच बनता है। खाली बर्तन में पानी गिरने से इसकी आवाज़ काफी भारी व क्रमशः बढती जाती है।
वायु स्तम्भ की लम्बाई के अनुसार ही ध्वनि की आवृति उत्पन्न होती है। लम्बा वायु स्तम्भ कम आवृति की ध्वनि पैदा करता है, वायु स्तम्भ की लम्बाई कम होने के साथ साथ ध्वनि की आवृति बढती जाती है।
